नित नए सपने अदम्य सहस
अप्रितम लक्ष्य बस मेरा साथ
लिए जा रहा हू
मैं बढ़ा जा रहा हू
नित नए संघर्ष अटूट विश्वास
केवल ध्रेय सम्मुख उजास
किए का रहा हू
मैं बढ़ा जा रहा हू
पारिस्थितिक लक्ष्य , मन की पुकार
"क्यू" को मिटा कर
चला जा रहा हू
मैं बढ़ा जा रहा हू
अनदेखी डगर , नीला आकाश
मोम के पंखो पर आज
उडा जा रहा हू
मैं बढ़ा जा रहा हू
नित नए पथ , नए पथ साथी
कुछ पल साथ और फिर यादें
छोडे जा रहा हू
मैं बढ़ा जा रहा हू
--- नरेन्द्र सिसोदिया "साहिल"
---- 14 / 9 / 2003
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Monday, June 9, 2008
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